सनातन परंपरा में मौनी अमावस्या को आत्मशुद्धि, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक साधना का एक अत्यंत पावन पर्व माना गया है। साल 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार के दिन मनाई जाएगी। माघ मास में पड़ने वाली यह अमावस्या विशेष गृह स्थितियों के कारण एक दुर्लभ आध्यात्मिक योग का निर्माण कर रही है। शास्त्रों के अनुसार, माघ के महीने में किया गया स्नान, दान और तर्पण कई जन्मों के पुण्यों के समान फलदायी होता है, जो साधक के भीतर संयम और आत्मिक शांति को मजबूत करता है
इस वर्ष मौनी अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह मकर संक्रांति के बाद उत्तरायण सूर्य के काल में पड़ रही है। उत्तरायण को देवताओं का दिन और प्रकाश की वृद्धि का समय माना जाता है। इस अवधि में सूर्य की ऊर्जा साधक के भीतर आत्मबल और सकारात्मकता का संचार करती है। उत्तरायण सूर्य और अमावस्या का यह दुर्लभ मेल जप, तप और दान के फल को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है ।




















